कल्पना क्या होती है? ये सवाल मेरे लिए अनेक संभावनाओं को जन्म देता है। और मैं निश्चित होने की धारा से बच जाता हूं आज मैं जो भी लेख लिखने का प्रयास कर रहा हूं वो आज तक की मेरी सोच समझ का परिणाम है।
इंसानों का जिंदा रहना कल्पनाओं का अस्तित्व में रहना होता है। जब तक हमारी सांसें चलती है हम कल्पना की अथाह गहराई में डुबते चले जाते हैं। चेतन या अचेतन दोनों ही अवस्था हमारी कल्पना हमारी समझ शक्ति तय करती है कि हम मानसिक तौर से कहा तक पहुंच पाए है ये दूसरी बात है कि मैं किसी मुकाम तक पहुंचने में विश्वास नहीं रखता।
इंसानों का जिंदा रहना कल्पनाओं का अस्तित्व में रहना होता है। जब तक हमारी सांसें चलती है हम कल्पना की अथाह गहराई में डुबते चले जाते हैं। चेतन या अचेतन दोनों ही अवस्था हमारी कल्पना हमारी समझ शक्ति तय करती है कि हम मानसिक तौर से कहा तक पहुंच पाए है ये दूसरी बात है कि मैं किसी मुकाम तक पहुंचने में विश्वास नहीं रखता।